सीबीआइ के नये निदेशक की दौड़ में 12 अधिकारी

  • 1983 से 85 बैच के अधिकारियों के नाम सरकार को भेजे गये
  • मुख्य न्यायाधीश पर निर्भर है बहुत कुछ
  • दौड़ में शिवानंद झा का नाम सबसे आगे
  • राकेश अस्थाना को गुजरात वापस भेजेंगे

रासबिहारी

नईदिल्लीः सीबीआइ के नये निदेशक पर शीघ्र ही फैसला होने वाला है। आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना विवाद के बाद अब सरकार भी फूंक फूंककर कदम रख रही है। वैसे अंदरखाने की सूचनाओं के मुताबिक इस दौड़ में भी सबसे आगे गुजरात कैडर के अधिकारी शिवानंद झा का नाम है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वह वर्तमान में गुजरात के डीजीपी हैं और प्रधानमंत्री से अच्छी तरह परिचित हैं।

मालूम रहे कि राकेश अस्थाना के खिलाफ घूसखोरी का मामला दायर होने के बाद रातोंरात हटाये गये आलोक वर्मा को सुप्रीम कोर्ट ने बहाल कर दिया था। सरकार द्वारा दोबारा उनका स्थानांतरण किये जाने के बाद श्री वर्मा ने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया है। दूसरी तरफ राकेश अस्थाना का भी अन्यत्र स्थानांतरण कर दिया गया है। वर्तमान में नागेश्वर राव अस्थायी निदेशक के तौर पर काम कर रहे हैं। सीबीआइ निदेशक का फैसला प्रधानमंत्री के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी करती है। इस कमेटी में विपक्ष के नेता और सुप्रीम कोर्ट के सर्वोच्च न्यायाधीश सदस्य होते हैं। इससे पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने अपने स्थान पर न्यायमूर्ति सिकरी को प्रतिनिधि बनाकर भेजा था। उस पर विवाद होने के बाद न्यायमूर्ति गोगाई ने अदालत में दायर एक सुनवाई से खुद को अलग कर यह संकेत दे दिया है कि सीबीआइ निदेशक की सिलेक्ट कमेटी में वह भाग लेने वाले हैं।

पीएमओ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक 1982 से 1985 बैच के आईपीएस इस पद की दौड़ में हैं। सरकार ने वरिष्ठता, अखंडता, भ्रष्टचार के केसों की जांच का अनुभव और सीबीआई में काम करने या विजिलेंस मामले संभालने के अनुभव के आधार पर 12 नामों को शॉर्टलिस्ट किया है। हाई पावर कमेटी की ओर से सीबीआई चीफ के पद से आलोक वर्मा  को हटाने के तीन सप्ताह के बाद यह बैठक हो रही है। इस कमेटी के अध्यक्ष पीएम मोदी हैं और सीजेआई रंजन गोगोई और नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे इसके सदस्य हैं। पीएमओ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक 1982 से 1985 बैच के आईपीएस ऑफिसर इस पद की दौड़ में हैं। सरकार ने वरिष्ठता, अखंडता, भ्रष्टचार के केसों की जांच का अनुभव और सीबीआई में काम करने या विजिलेंस मामले संभालने के अनुभव के आधार पर 12 नामों को शॉर्टलिस्ट किया है।

पीएमओ में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘सरकार इस बार कोई चांस नहीं लेना चाहती, इसलिए उन्होंने एक दर्जन से ज्यादा अधिकारियों के नाम शॉर्टलिस्ट किए हैं।’ जिन अधिकारियों के नाम शॉर्टलिस्ट किए गए हैं, उनमें 1983 बैच के अधिकारी शिवानंद झा (अभी गुजरात के डीजीपी हैं), बीएसएफ डायरेक्टर जनरल रजनीकांत मिश्रा, सीआईएसएफ डायरेक्टर जनरल राजेश रंजन, एनआईए डायरेक्टर जनरल वाईसी मोदी और मुंबई पुलिस कमिश्नर सुबोध जयसवाल शामिल हैं। अनुमान है कि अगर मामला वरिष्ठता पर फंसता है तो सरकार झा के नाम के साथ जा सकती । पीएम उन्हें अच्छे से जानते हैं, उन्होंने झा को अहमदाबाद का पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया था।’ झा 2021 में रिटायर होंगे। अगर गुजरात डीजीपी का पद खाली होता है तो मोदी सरकार सीबीआई के नंबर-2 राकेश अस्थाना को वहां भेज सकती है। अधिकारी के मुताबिक एनआईए के डायरेक्टर जनरल वाईसी मोदी भी सीबीआई चीफ पद के लिए मजबूत दावेदार हैं। उन्होंने कहा, ‘उनका आरएसएस से भी जुड़ाव रहा है और काफी लंबे समय तक सीबीआई में काम किया है।’ वाईसी मोदी उस विशेष जांच टीम का हिस्सा भी थे, जिसने गुजरात दंगों की जांच की थी। सूत्रों के मुताबिक बीएसएफ के डायरेक्टर जनरल आरके मिश्रा के नाम पर भी विचार हो सकता है, क्योंकि वह पीएम के मुख्य सचिव नृपेंद्र मिश्रा के करीबी हैं। इसके साथ ही बताया गया है कि मुंबई पुलिस कमिश्नर सुबोध जयसवाल का भी आरएसएस से जुड़ाव रहा है।

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