कैंसर की दवा खोजने के करीब इटली के वैज्ञानिक भी

  • रोम के जेमेली अस्पताल के निदेशक टोरतोरा ने संक्षिप्त जानकारी दी

  • दुनिया का अन्यतम स्थापित अस्पताल है यह

  • अब माइक्रोविटा के स्तर पर ईलाज पर काम हो

  • कैंसर के दोबारा लौटने पर ईलाज होता है कठिन

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः कैंसर की दवा की शोध दुनिया भर में चल रही है। इजरायल की एक कंपनी के दावे के तुरंत बाद इटली ने भी ऐसा ही दावा किया है। वहां के रोम स्थित मेडिकल ओंकोलजी के पोलिक्लीनिको जेमेली अस्पताल के निदेशक जियामपाओलो टोरतोरा ने यह दावा किया है।  उन्होंने कहा कि पहले के मुकाबले कैंसर के ईलाज में दुनिया भर में तरक्की हुई है। अब कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के कई तरीके सामने आ गये हैं। अब शोध वहां तक पहुंच रहा है, जहां कैंसर कोशिकाओं को पराजित करने की क्षमता विकसित करने की पद्धति शरीर में विकसित की जाए। यह अस्पताल और खुद टोरतोरा पैंक्रियाज के कैंसर के विश्व के जाने माने विशेषज्ञ हैं। उन्होंने कहा कि इस तरक्की के दो अथवा तीन आयाम हैं। वर्तमान में हम इम्युनोथेरापी पर काम कर रहे हैं। लेकिन इस विधि के भी अलग अलग प्रभाव देखे गये हैं। कुछ रोगियों में यह विधि बहुत कारगर होती है जबकि कुछ में इसका असर नहीं होता है। इसलिए रोगियों को पहले ही इस विधि के बारे में बता दिया जाना चाहिए कि कोशिश कामयाब नहीं भी हो सकती है। कई बार रोगी के ठीक हो जाने के बाद भी रोग दोबारा वापस लौट आता है। उन्होंने कहा कि दरअसल इंसान अथवा किसी भी जीव के जिंदा होने की संघर्ष शक्ति के बारे में मेडिकल साइंस अब तक बहुत कम जान पाया है। इसलिए उस दिशा में अभी बहुत काम करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि अब चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में खास तौर पर माइक्रोविटा पर काम करने की जरूरत है। इसके माध्यम से ही दुनिया को कैंसर से लड़ने की असली ताकत प्राप्त होगी। इसे विकसित कर इंसानी शरीर के अंदर कैंसर से लड़ने की क्षमताओं का विकास किया जा सकता है। शरीर के अंदर यह विधि विकसित होने का संतुलन समझ में आने के बाद कैंसर रोगी खुद ही इसकी रोकथाम और उपचार भी कर सकेंगे।

उन्होंने कैंसर के अनुसंधान की दिशा में अपने नये कैंसर केंद्र के बारे में जानकारी दी लेकिन अनुसंधान की प्रगति के बारे में ज्यादा कुछ कहने से बचते रहे। उनका साफ कहना था कि यह अभी शोध के स्तर पर हैं। तमाम किस्म के परीक्षणों में सफल होने के बाद इसकी विस्तृत जानकारी देना ज्यादा उचित होगा। अभी इस बारे में जानकारी देना दरअसल अधूरी जानकारी देना होगा। मालूम हो कि इस अस्पताल ने अब तक 48 हजार से अधिक कैंसर रोगियों का ईलाज किया है। जो दुनिया के अनेक बड़े कैंसर अस्पतालों की तुलना में काफी अधिक है। अपने तीस वर्षों के मेडिकल पेशा के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान कैंसर के ईलाज में अनेक विधियां सामने आयी हैं। इसलिए अब ईलाज के प्रति शरीर के अंदर प्रतिरोधक तैयार करने की दिशा में काम होना चाहिए। इससे मरीज को खुद ही बीमारी से लड़ने की क्षमता प्राप्त हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि निरंतर शोध के क्रम में पहले यह समझा गया था कि किमोथैरापी और कोशिका आधारित ईलाज से कैंसर को रोक पाना संभव होगा। लेकिन बाद में यह प्रमाणित हो गया कि हर मामले में यह एक जैसा प्रभाव नहीं छोड़ता। इन दोनों में सबसे बड़ी परेशानी रोग के समाप्त होने के बाद दोबारा लौट आने की है। दोबारा लौट आने की स्थिति में रोगी का ईलाज और भी कठिन हो जाता है।

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