अमेरिकी वैज्ञानिकों की तकनीक से सुधरेगी बंजर जमीन

  • तेल से बंजर हो चुके जमीन भी अब उपजाऊ बनेगी

  • पेट्रोलियम की चपेट में आकर बंजर होती है जमीन

  • अनेक इलाको में बन चुकी है बहुत बड़ी समस्या

  • नये सिरे से उपजाऊ और हरा भरा बनेगा इलाका

प्रतिनिधि

नईदिल्लीः अमेरिका के वैज्ञानिकों ने पेट्रोलियम पदार्थों के फैलने से बंजर हो चुकी जमीन को नये सिरे से उपजाऊ बनाने की एक विधि विकसित की है। जमीन के अंदर ऐसे तेल एक बार फैल जाने के बाद उस जमीन में कुछ नहीं उगता है। दुनिया के अनेक इलाको में इसी किस्म के तेल रिसाव अथवा फैलने की वजह से हजारों एकड़ जमीन बंजर हो चुकी है। अब इस विधि के बन जाने से फिर से ऐसी बंजर जमीनों को हरा भरा बनाया जा सकेगा।
पता रहे कि पेट्रोलियम पदार्थों को ले जाने के क्रम में समुद्री जहाज अथवा सामान्य वाहनों से भी ऐसा रिसाव होता है। कई बार समुद्र में बड़ा रिसाव होने की वजह से कई इलाकों का बड़ा भूभाग इसकी चपेट में आ जाता है क्योंकि समुद्र में फैला तेल अंततः किसी न किसी इलाके तक आ पहुंचता है। वहां की सतह पर इसके फैलने से भी जमीन बंजर हो जाती है।
राइस विश्वविद्यालय ने इसी चुनौती पर काम करते हुए सफलता पा ली है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने मिट्टी को गर्म कर उसमें मौजूद उन तत्वों को बाहर कर दिया, जो जमीन को बंजर बनाने के असली कारक थे। मिट्टी को गर्म करने की यह विधि पाइरोलाइसिस कहलाती है। यह विधि काफी समय से प्रचलन में हैं। इस बार वैज्ञानिकों ने उसी विधि को और उन्नत बनाया है। जिससे काम आसान हो गया है। मिट्टी में मौजूद ऑक्सीजन को बाहर कर जब उसे गर्म किया जाता है तो उसके अंदर मौजूद हाइड्रो कार्बन जल जाते हैं। इसी की वजह से जमीन का तापमान ऊपर नीचे होता रहता है और वह बंजर बनी रहती है।
राइस विश्वविद्यालय के पेड्रो अलवारेज ने इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि एक रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया था कि हर साल तेल रिसाव की करीब 25 हजार घटनाएं होती हैं। इस रिसाव का 98 प्रतिशत असर मिट्टी पर ही पड़ता है। इसकी चपेट में आने वाली जमीन बंजर होने के बाद किसी काम की नहीं रह जाती। इसी स्थिति को समझते हुए शोध कर्ताओं ने इस पर काम करना प्रारंभ किया। इस चुनौती को एक अवसर में बदलने के लिए कई प्रयोग किये गये। प्रयोगशाला में सबसे पहले भारी क्रूड ऑयल पर काम किया गया। जमीन को प्रयोगशाला में ही गर्म कर उस तापमान को तय किया गया, जब मिट्टी में मौजूद तेल का अधिकांश भाग जल कर समाप्त हो गया। इस प्रयोग में यह पाया गया कि जब मिट्टी को किसी घूमते हुए ड्रम में रखकर 420 डिग्री तक करीब 15 मिनट तक गर्म किया जाता है तो मिट्टी में मौजूद पेट्रोलियम हाइड्रो कार्बन (टीपीएच) और 94.5 प्रतिशत पॉलिसाइक्लिक एरोमेटिक हाइड्रो कार्बन (पीएएच) बाहर निकल जाते हैं। इस प्रक्रिया के पूरी होने के बाद मिट्टी फिर से अपनी पूर्व स्थिति में लौटने लगती है।
इसी विश्वविद्यालय के काइरियाकोस झाइगोराकिस ने बताया कि मिट्टी की उर्वरता यथावत रखने के लिए सिर्फ मिट्टी गर्म करने की विधि को परिष्कृत किया गया है। शोध दल ने इस काम में कम से कम ऊर्जा खर्च हो, इस पर भी ध्यान दिया है ताकि प्रदूषण मुक्त जमीन को सकुशल जल्दी वापस स्थिति बहाल किया जा सके। इस विधि से परिष्कृत जमीन फिर से पूर्ववत उपजाऊ बन जाती है, परीक्षण में यह प्रमाणित हो चुकी है।
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट कर दिया कि जल्दबाजी में अधिक गर्म करने पर मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है। इसलिए इसे ज्यादा गर्म भी नहीं किया जाना चाहिए।
अब वैज्ञानिक यह पा रहे हैं कि दो सौ से तीन सौ डिग्री तापमान तक में जमीन में मौजूद ऐसे तत्व खुद ही वाष्पीकृत होकर उड़ जाते हैं। इससे अधिक गर्मी पाने बाद जमीन में समा चुके पेट्रोलियम पदार्थों के हाइड्रो कार्बन टूटने लगते हैं और एक क्रमिक प्रक्रिया की वजह से जमीन का यह प्रदूषण समाप्त हो जाता है।
इस विधि से परिष्कृत की गयी जमीन पर सब्जी उगाकर वैज्ञानिकों ने सफलता पायी है और यह भी पाया है कि परिष्कृत जमीन की उर्वरता भी वास्तविक जमीन की जितनी ही है। इस प्रयोग के किये जाने के पहले 21 दिन तक कोई खास प्रतिक्रिया नजर नहीं आयी थी। 21 दिन के बाद उनकी गुणवत्ता असली जमीन की जितनी ही हो गयी। यहां तक कि इसमें उगायी गयी सब्जियां भी आम जमीन की सब्जी जैसी ही थी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>